आदर्श आयुर्वेदिक दिनचर्या

इन नियमो का पालन पूरी ईमानदारी से अपनी ज़िंदगी मे करे |
ये है एक आदर्श आयुर्वेदिक दिनचर्या |
ये नियमो का पालण न करने से ही बीमारियाँ ज़िंदगी मे आती हैं |
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->सुबह उठते ही सबसे पहले हल्का गर्म पानी पिये | 2 से 3 गिलास जरूर पिये |
->पानी हमेशा बैठ कर पिये |
->पानी हमेशा घूट घूट करके पिये |
->घूट घूट कर इसलिए पीना है | ताकि सुबह की जो मुंह की लार है इसमे ओषधिए गुण बहुत है | ये लार पेट मे जानी चाहिए | वो तभी संभव है जब आप पानी बिलकुल घूट घूट कर मुंह मे घूमा कर पिएंगे |
->इसके बाद दूसरा काम पेट साफ करने का है | रोज पानी पीकर सुबह शोचालय जरूर जाये |पेट का सही ढंग से साफ न होना 108 बीमारियो की जड़ है |
->खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है |
->हमेशा डेड घंटे बाद ही पानी पीएं |
->खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं |
1) जूस
2) छाज (लस्सी) या दहीं
3) दूध
->सुबह खाने के बाद अगर कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये |
->दोपहर को दहीं खाये | या लस्सी पिये |
->और दूध हमेशा रात को पिये |
->इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे | फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) | दहीं दोपहर को दूध रात को |
->इसके इलावा खाने के तेल मे भूल कर भी refined oil का प्रयोग मत करे | (वो चाहे किसी भी कंपनी का क्यू न हो dalda, ruchi, gagan)को भी हो सकता है |
->अभी के अभी घर से निकाल दें | बहुत ही घातक है |
->सरसों के तेल का प्रयोग करे | या देशी गाय के दूध का शुद्ध घी खाएं | (पतंजलि का सरसों का तेल एक दम शुद्ध है | (शुद्ध सरसों के तेल की पहचान है मुंह पर लगाते ही एक दम जलेगा | और खाना बनाते समय आंखो मे हल्की जलन होगी |
->चीनी का प्रयोग तुरंत बंद कर दीजिये | गुड खाने का प्रयोग करे या शक्कर खाये | चीनी बहुत बीमारियो की जड़ (slow poison) है |
->खाना बनाने मे हमेशा सेंधा नमक या काला नमक का ही प्रयोग करे | आयोडिन युक्त नमक कभी न खाएं |
->(ये नमक वाली बात आपको अजीब लग सकती हैं | लेकिन बहुत रहस्यमय कहानी है इस आयोडीन युकत नमक के पीछे |)
->सुबह का भोजन सूर्य उद्य होने के 2 से 3 घंटे तक कर लीजिये | (अगर 7 बजे आपके शहर मे सूर्य निकलता है | तो 9 या 10 बजे तक सुबह का भोजन कर लीजिये | इस दौरान जठर अग्नि सबसे तेज होती है | सुबह का खाना हमेशा भर पेट खाएं | सुबह के खाने मे पेट से ज्यादा मन संतुष्टि होना जरूरी है | इसलिए अपनी मनपसंद वस्तु सुबह खाएं |
->खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे | लेकिन इससे ज्यादा नहीं |
->इसी प्रकार दोपहर को खाना खाने के तुरंत बाद ठीक 20 मिनट के लिए बायीं लेट जाएँ और अगर शरीर मे आलस्य ज्यादा है तो 40 मिनट मिनट आराम करे | लेकिन इससे ज्यादा नहीं |
->रात को खाना खाने के तुरंत बाद नहीं सोना | रात को खाना खाने के बाद बाहर सैर करने जाएँ | कम से कम 500 कदम सैर करे | और रात को खाना खाने के कम स कम 2 घंटे बाद ही सोएँ |
->ब्रह्मचारी है (विवाह के बंधन मे नहीं बंधे ) तो हमेशा सिर पूर्व दिशा की और करके सोएँ | ब्रह्मचारी नहीं है तो हमेशा सिर दक्षिण की तरफ करके सोएँ | उत्तर और पश्चिम की तरफ कभी सिर मत करके सोएँ |
->मैदे से बनी चीजे पीज़ा, बर्गर, hotdog, पूलड़ोग, आदि न खाएं | ये सब मेदे को सड़ा कर बनती है | कब्ज का बहुत बड़ा कारण है | (और ऊपर आपने पढ़ा कब्ज से 108 रोग आते हैं |)
इन सब नियमो का अगर पूरी ईमानदारी से प्रयोग करेंगे | 1 से 2 महीने मे ऐसा लगेगा पूरी जिंदगी बदल गई है | मोटापा है तो कम हो जाएगा | high BP, cholesterol, triglycerides सब level पर आना शुरू हो जाएगा | HDL बढ्ने लगेगा | LDL ,VLDL कम होने लगेगा | और भी बहुत से बदलाव आप देखेंगे |

आदर्श आयुर्वेदिक दिनचर्या
आदर्श आयुर्वेदिक दिनचर्या
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