जीवन का आधार… आयुर्वेद

जीवन का आधार… आयुर्वेद

Feb2016WHO कहता है की भारत में ज्यादा से ज्यादा केवल 350 दवाओं की आवश्यकता है | अधिकतम केवल 350 दवाओं की जरुरत है, और हमारे देश में बिक रही है 84000 दवाएं | यानि जिन दवाओं की जरुरत ही नहीं है वो डॉक्टर हमें खिलाते है क्योंकि जितनी ज्यादा दवाएं बिकेगी डॉक्टर का कमिशन उतना ही बढेगा |
एक बात साफ़ तौर पर साबित होती है की भारत में एलोपेथी का इलाज कारगर नहीं हुआ है | एलोपेथी का इलाज सफल नहीं हो पाया है |इतना पैसा खर्च करने के बाद भी बीमारियाँ कम नहीं हुई बल्कि और बढ़ गई है | यानि हम बीमारी को ठीक करने के लिए जो एलोपेथी दावा खाते है उसमे और नई तरह की बिमारियां सामने आने लगी है |
ये दवा की कंपनिया बहुत बड़ा कमिशन देती है डॉक्टर को | यानि डॉक्टर कमिशन खोर हो गए है या यूँ कहे की डॉक्टर दवा कम्पनियों के एजेंट हो गए है |
सारांश के रूप में हम कहे की मौत का खुला व्यापार धड़ल्ले से पूरे भारत में चल रहा है तो कोई गलत नहीं होगा |
फिर सवाल आता है की अगर इन एलोपेथी दवाओ का सहारा न लिया जाए तो क्या करे? इन बिमारियों से कैसे निपटा जाये?
……………. तो इसका एक ही जवाब है आयुर्वेद|
एलोपेथी के मुकाबले आयुर्वेद श्रेष्ठ क्यों है?:-
(१) पहली बात आयुर्वेद की दवाएं किसी भी बीमारी की जड़ से समाप्त करती है, जबकि एलोपेथी की दवाएं किसी भी बीमारी को केवल कंट्रोल में रखती है |
(२) दूसरा सबसे बड़ा कारण है की आयुर्वेद का इलाज लाखो वर्ष पुराना है, जबकि एलोपेथी दवाओं की खोज कुछ शताब्दियों पहले हुई |
(३) तीसरा सबसे बड़ा कारण है की आयुर्वेद की दवाएं घर में, पडोश में या नजदीकी जंगल में आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जबकि एलोपेथी दवाएं ऐसी है की आप गाँव में रहते हो तो आपको कई किलोमीटर चल कर शहर आना पड़ेगा और डॉक्टर से लिखवाना पड़ेगा |
(४) चौथा कारण है की ये आयुर्वेद दवाएं बहुत ही सस्ती है या कहे की मुफ्त की है, जबकि एलोपेथी दवाओं की किमत बहुत ज्यादा है | एक अनुमान के मुताबिक एक आदमी की जिंदगी की कमाई का लगभग ४०% हिस्सा बीमारी और इलाज में ही खर्च हो जाता है |
(५) पांचवा कारण है की आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, जबकि एलोपेथी एक बीमारी में इस्तेमाल करो तो उसके साथ दुसरी बीमारी अपनी जड़े मजबूत करने लगती है |
(६) छठा कारण है की आयुर्वेद में सिद्धान्त है की इन्सान कभी बीमार ही न हो और इसके छोटे छोटे उपाय है जो बहुत ही आसान है | जिनका उपयोग करके स्वस्थ रहा जा सकता है जबकि एलोपेथी के पास इसका कोई सिद्धान्त नहीं है |
(७) सातवा बड़ा कारण है की आयुर्वेद का ८५% हिस्सा स्वस्थ रहने के लिए है और केवल १५% हिस्से में आयुर्वेदिक दवाइयां आती है, जबकि एलोपेथी का 15% हिस्सा स्वस्थ रहने के लिए है और 85% हिस्सा इलाज के लिए है |

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